‘विधायक का भतीजा’ कर रहा था गांजे की भारी तस्करी, छिंदवाड़ा पुलिस की कार्रवाई में 320 किलो गांजा, पिस्तौल और लग्जरी वाहन बरामद
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा पुलिस द्वारा की गई एक बड़ी कार्रवाई ने उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के हर्रैया क्षेत्र में चल रहे अवैध नशे के काले कारोबार की पोल खोल दी है। छिंदवाड़ा पुलिस ने 320 किलो गांजा, एक पिस्तौल, एक ट्रक, एक टाटा सफारी और भारी नकदी के साथ तस्करों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए तस्करों में से एक ने हर्रैया तहसील पुलिस को दिए बयान में खुलासा किया है कि वह एक 'विधायक का भतीजा' है।
अजीत मिश्रा (खोजी)
- तस्करों की कार पर मिला उत्तर प्रदेश विधानसभा का ‘एमएलए 602’ पार्किंग पास और अधिवक्ता का स्टीकर
- हर्रैया क्षेत्र बना गांजा और स्मैक का सुरक्षित गढ़, मध्य प्रदेश पुलिस के खुलासे के बाद स्थानीय पुलिस और एलआईयू की कार्यप्रणाली कटघरे में
- महज 25 वर्ष की उम्र में करोड़ों की संपत्ति, आलीशान मकान और एक करोड़ से अधिक की लग्जरी गाड़ियों का मालिक निकला मुख्य तस्कर शुभम सिंह
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का हर्रैया क्षेत्र अब अपराधियों और सफेदपोशों की सुरक्षित पनाहगाह बन चुका है, जिसका पर्दाफाश मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा पुलिस ने किया है। छिंदवाड़ा पुलिस द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाई में 320 किलो गांजा, एक पिस्तौल, एक ट्रक, एक टाटा सफारी और भारी नकदी बरामद की गई है। इस खुलासे ने स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पकड़े गए तस्करों में से एक ने पूछताछ में कबूला है कि वह किसी ‘विधायक का भतीजा’ है, हालांकि छिंदवाड़ा पुलिस ने अभी उसके नाम का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है। हैरानी की बात यह है कि तस्करों की बरामद कार पर उत्तर प्रदेश विधानसभा का ‘एमएलए 602’ पार्किंग पास और अधिवक्ता का स्टीकर चस्पा मिला है। इस सनसनीखेज खुलासे से साफ होता है कि कैसे राजनीतिक और रसूखदार संरक्षण के साये में नशे का यह काला कारोबार फल-फूल रहा है।
इस काले कारोबार में दबोचे गए मुख्य चेहरों में पैकोलिया के भैरोपुर निवासी शुभम सिंह, भाजपा सभासद मनीषा के देवर एवं गांजा तस्कर दुर्गेश सोनकर के भाई कृष्ण कुमार, और अटावपुर अवधी हर्रैया का आदर्श शामिल हैं। मात्र 25 वर्ष की उम्र में भैरोपुर के शुभम सिंह के पास करोड़ों रुपये के आलीशान मकान, एक करोड़ से अधिक की कई लग्जरी गाड़ियां, दस हजार का जूता, पांच हजार की चप्पल और गले में सोने की चेन पाई गई है, जबकि उसका कोई वैध व्यवसाय नहीं है।
तस्करों के खुलासे और मुख्य गिरफ्तारियां
- मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा पुलिस को दिए गए बयान में हर्रैया तहसील के एक तस्कर ने कबूल किया है कि वह एक ‘विधायक का भतीजा’ है, हालांकि छिंदवाड़ा पुलिस ने अभी उसके नाम का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है।
- पकड़ी गई तस्करों की एक कार पर उत्तर प्रदेश विधानसभा का ‘एमएलए 602’ पार्किंग पास और अधिवक्ता का स्टीकर चस्पा हुआ मिला है।
- इस भारी मात्रा में गांजे और हथियारों के साथ बस्ती जिले के चार शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें पैकोलिया के भैरोपुर निवासी शुभम सिंह, भाजपा सभासद मनीषा के देवर एवं गांजा तस्कर दुर्गेश सोनकर के भाई कृष्ण कुमार, और अटावपुर अवधी हर्रैया के आदर्श शामिल हैं।
- मात्र 25 वर्ष की उम्र में भैरोपुर निवासी शुभम सिंह के पास करोड़ों रुपये के आलीशान मकान, एक करोड़ से अधिक की कई लग्जरी गाड़ियां, दस हजार रुपये का जूता, पांच हजार रुपये की चप्पल, पांच हजार की टी-शर्ट और गले में सोने की चेन पाई गई है, जबकि उसका कोई वैध व्यवसाय नहीं है।
तस्करी के तौर-तरीके और स्थानीय पुलिस की भूमिका पर सवाल
- हर्रैया तहसील अब एक सामान्य थाना क्षेत्र न रहकर गांजा और स्मैक तस्करों का सुरक्षित गढ़ बन चुकी है, जहां अब तस्करों की गिरफ्तारियां दूसरे प्रांत की पुलिस द्वारा की जा रही हैं।
- तस्कर पुलिस की नजरों से बचने के लिए मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) का उपयोग करने से बचते हैं क्योंकि वहां पुलिस की चहल-पहल और पिकेट रहती है। इसके बजाय वे ओड़ार की सड़कों और आंतरिक मार्गों का इस्तेमाल करते हैं।
- रिपोर्ट में यह सबसे बड़ा सवाल उठाया गया है कि जब दूसरे राज्य (मध्य प्रदेश) की पुलिस इतनी भारी मात्रा में गांजा पकड़ सकती है, तो स्थानीय हर्रैया पुलिस केवल 40-50 किलो गांजा पकड़कर क्यों खानापूर्ति करती है और कंटेनर में तस्करी क्यों होने देती है?
- स्थानीय पुलिस और एलआईयू (LIU) के खुफिया तंत्र की विफलता पर सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी कौन सी निगरानी चल रही थी कि 25 साल के शुभम सिंह के पास अकूत संपत्ति और लग्जरी वाहन आ गए और खुफिया तंत्र को भनक तक नहीं लगी। यदि खुफिया तंत्र सक्रिय होता, तो रवि गुप्ता और दीपक चौहान कभी सभासद मनोनीत नहीं हो पाते और न ही तस्करी के जरिए दौलतमंद बन पाते।
सफेदपोश अपराध और राजनीतिक-प्रशासनिक सांठगांठ
- अधिवक्ता नरेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि राजनीति अब एक व्यवसाय बन चुकी है, जहां कोई निश्चित वेतन या मानदेय नहीं मिलता। अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा, हैसियत बढ़ाने, चार पहिया वाहन मेंटेन करने और अपना विकास करने के लिए लोग अब गांजा, अफीम और स्मैक के अवैध धंधे में उतर रहे हैं।
- इसी वजह से सफेदपोश अपराध और क्षेत्र में यौन उत्पीड़न जैसी घटनाएं दिन-रात बढ़ रही हैं, तथा नौकरशाही व कर्मचारियों की ईमानदारी केवल किताबों की कहानी बनकर रह गई है।
- इस पूरे घटनाक्रम और व्यवस्था पर विजय शंकर त्रिपाठी, योगेंद्र पाही और अनिल तिवारी जैसे स्थानीय लेखकों व टिप्पणीकारों ने भी तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं।
सवाल यह उठता है कि जब दूसरे राज्य की पुलिस इतनी बड़ी खेप पकड़ सकती है, तो स्थानीय हर्रैया पुलिस और एलआईयू क्या कर रही है? स्थानीय पुलिस सिर्फ 40-50 किलो गांजा पकड़कर खानापूर्ति करती है और कंटेनर व अन्य माध्यमों से होने वाली बड़ी तस्करी पर आंखें मूंद लेती है। तस्कर मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग के बजाय ओड़ार की सड़कों का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि वहां पुलिस पिकेट और गतिविधियों के बीच उनका रास्ता आसान होता है। यदि खुफिया तंत्र और बीट पुलिस अधिकारी ईमानदार होते, तो रवि गुप्ता और दीपक चौहान कभी सभासद मनोनीत नहीं हो पाते और न ही तस्करी के बल पर दौलतमंद बन पाते।
अधिवक्ता नरेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि राजनीति अब व्यवसाय बन चुकी है, जहां मानदेय नहीं मिलता बल्कि अपनी हैसियत बढ़ाने, चार पहिया वाहन मेंटेन करने और अपना विकास करने के लिए लोग गांजा, अफीम और स्मैक के धंधे में उतर रहे हैं। इसी कारण सफेदपोश अपराध और क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियां दिन-रात बढ़ रही हैं, जबकि नौकरशाही की ईमानदारी केवल किताबों की कहानी बनकर रह गई है। विजय शंकर त्रिपाठी, योगेंद्र पाही और अनिल तिवारी जैसे स्थानीय लेखकों ने भी इस व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए व्यवस्था के संरक्षकों और तस्करों की इस खतरनाक सांठगांठ को उजागर किया है।














